भीमताल : ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और महिला स्वयं सहायता समूहों व स्थानीय उद्यमियों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को ग्रामीण उद्यम त्वरण परियोजना (आरईएपी) के तत्वावधान में स्वरोजगार एवं मार्केटिंग विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों, स्थानीय उद्यमियों और अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि बदलते दौर में बाजार अब स्थानीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है। डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से ग्रामीण उद्यमी अपने उत्पाद देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों तक पहुंचा सकते हैं। इसके लिए उत्पाद की गुणवत्ता के साथ ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रतिभागियों से स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों में प्राकृतिक और पारंपरिक विशेषताएं हैं। उचित ब्रांडिंग और विपणन के माध्यम से इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
ऑनलाइन मार्केटिंग पर जोर
कार्यशाला में सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स वेबसाइट, डिजिटल कैटलॉग और ऑनलाइन भुगतान जैसे माध्यमों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता, विशेषता, निर्माण प्रक्रिया और उपयोगिता को संभावित ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण फोटो, वीडियो और अन्य प्रचार सामग्री तैयार करने पर जोर दिया गया।
पैकेजिंग को बताया उत्पाद की पहचान
विशेषज्ञों ने ब्रांडिंग और पैकेजिंग के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि उत्पाद का नाम, लोगो, पैकेजिंग, लेबलिंग और प्रस्तुतीकरण उसकी पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पैकेजिंग आकर्षक होने के साथ सुरक्षित और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। उत्पाद से संबंधित आवश्यक जानकारी पैकेजिंग पर उपलब्ध होने से उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ता है।
योजनाओं की दी जानकारी
आरईएपी परियोजना के अधिकारियों ने परियोजना के तहत संचालित गतिविधियों और उपलब्ध योजनाओं की जानकारी दी। प्रतिभागियों को स्वरोजगार, उद्यम स्थापना, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, क्षमता विकास और उत्पादों के विपणन से संबंधित सहयोग के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण के साथ उत्पादन से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना जरूरी है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों ने अपने उद्यमों और उत्पादों से जुड़े अनुभव साझा किए तथा बाजार में आने वाली चुनौतियों पर विशेषज्ञों से जानकारी ली। विशेषज्ञों ने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने, नए ग्राहक बनाने और बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने के सुझाव दिए।
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण से मिली जानकारी को अपने उद्यमों में लागू करने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रयास करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में आरईएपी परियोजना से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, स्थानीय उद्यमी और अन्य प्रतिभागी मौजूद रहे।