अधिवक्ताओं के सम्मान पर आंच बर्दाश्त नहीं, बार का सख्त रुख

प्रथम अपर जिला जज न्यायालय के बहिष्कार का ऐलान, सोमवार से कामकाज ठप करने की चेतावनी

भीमताल। जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं और न्यायालय के बीच चल रहा विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। बार एसोसिएशन ने प्रथम अपर जिला जज (विशेष न्यायाधीश/एनडीपीएस) पर अभद्र और अपमानजनक व्यवहार के आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का संकेत दिया है।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से न्यायालय में असहज माहौल बना हुआ है। कई बार आपसी बातचीत और सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि न्यायालय में गवाहों पर दबाव बनाकर बयान दर्ज कराए जा रहे हैं, मनमाने तरीके से बयान लिखे जा रहे हैं, यहां तक कि अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति में तथ्यों में बदलाव तक किया जा रहा है।
अधिवक्ताओं का यह भी कहना है कि शिकायत लेकर पहुंचने पर उन्हें नजरअंदाज किया जाता है और कथित तौर पर धमकाकर व अपमानित कर न्यायालय से बाहर भेज दिया जाता है। शुक्रवार को बार एसोसिएशन की आम सभा में इस मुद्दे पर तीखी नाराजगी सामने आई। इसके बाद पदाधिकारियों ने न्यायाधीश से मुलाकात की, जहां व्यवहार में सुधार का आश्वासन दिया गया।
हालांकि, अधिवक्ताओं के अनुसार यह आश्वासन अगले ही दिन बेअसर साबित हुआ। शनिवार को फिर एक अधिवक्ता के साथ कथित अभद्रता की घटना सामने आई। पीड़ित अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि शिकायत उठाने पर न्यायाधीश ने अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिससे अधिवक्ताओं में आक्रोश और बढ़ गया।
स्थिति को गंभीर मानते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण बिष्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, सचिव संजय सुयाल ने घोषणा की कि सोमवार से प्रथम अपर जिला जज की अदालत का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
बार एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण की विस्तृत शिकायत उच्च न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारियों से की जाएगी। चेतावनी दी गई है कि जब तक संबंधित न्यायिक अधिकारी के व्यवहार में ठोस सुधार नहीं होता, तब तक बहिष्कार जारी रहेगा।
अधिवक्ताओं ने इस पूरे मामले को अपने सम्मान और अधिकारों से जुड़ा बताते हुए किसी भी प्रकार का समझौता न करने का ऐलान किया है।

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