जनसुनवाई में आयुक्त दीपक रावत सख्त, लंबित मामलों पर अधिकारियों को फटकार; एससी-एसटी भूमि खरीद, नजूल भूमि और सड़क निर्माण पर दिए कड़े निर्देश

भीमताल , 27 जून। आयुक्त एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने शनिवार को आयुक्त कैंप कार्यालय में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में भूमि विवाद, नजूल भूमि, सड़क निर्माण, पेयजल, विद्युत तथा राजस्व अभिलेखों से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करते हुए कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण कराया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

जनसुनवाई के दौरान हल्द्वानी निवासी ईश्वरी दत्त ने बताया कि चार भाइयों के बीच भूमि के कुर्रे (फाट) के आदेश उपजिलाधिकारी कार्यालय से करीब नौ माह पहले पारित हो चुके हैं, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ। इस पर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए उपजिलाधिकारी हल्द्वानी को तलब किया और सभी लंबित कुर्रा मामलों का शीघ्र निस्तारण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसडीएम कोर्ट से धारा 176 के तहत आदेश पारित होने के बावजूद कार्रवाई में देरी करने वाले लेखपालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

बैलपड़ाव निवासी उमा देवी ने शिकायत की कि उनके पुत्रों ने उनकी अनुसूचित जाति की भूमि एक सामान्य वर्ग के व्यक्ति को बेच दी, जिस पर भवन भी बना दिया गया है। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सामान्य अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति बिना सक्षम अनुमति के एससी-एसटी की कृषि भूमि नहीं खरीद सकता। ऐसा करना अवैध एवं दंडनीय अपराध है। उन्होंने उपजिलाधिकारी रामनगर को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

आयुक्त ने कहा कि यदि कोई सामान्य वर्ग का व्यक्ति एससी-एसटी की भूमि खरीदना चाहता है तो उसे संबंधित राजस्व नियमों के तहत जिलाधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति की गई रजिस्ट्री अथवा इकरारनामा निरस्त किया जा सकता है।

ग्राम सभा छिड़ा के ग्रामीणों ने वीरभट्टी-छिड़ा मोटर मार्ग निर्माण में वन विभाग की आपत्ति के कारण हो रही देरी की शिकायत की। बताया गया कि सड़क के लिए धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस पर आयुक्त ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर वन विभाग की आपत्तियों का शीघ्र निस्तारण कर सड़क निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए।

हल्द्वानी निवासी विपिन चंद्र ने खतौनी में नाम गलत दर्ज होने की शिकायत की। आयुक्त ने उपजिलाधिकारी को नियमानुसार अभिलेखों में संशोधन कर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए।

रामनगर निवासी नितिन ढोमणे ने शिकायत की कि उन्होंने धोखाधड़ी से नजूल भूमि खरीद ली थी और अपनी धनराशि तथा भूखंड वापस दिलाने की मांग की। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने संबंधित विक्रेता से शिकायतकर्ता की धनराशि शीघ्र लौटाने के निर्देश दिए। यदि तत्काल भुगतान संभव न हो तो शिकायतकर्ता को चेक उपलब्ध कराने को कहा।

इसके साथ ही आयुक्त ने संबंधित पटवारी को निर्देश दिए कि सभी नजूल भूमि पर प्रमुख स्थानों पर सूचना पट्ट लगाए जाएं, जिन पर स्पष्ट रूप से लिखा हो कि “यह भूमि सरकार की निजी संपत्ति है। इसका क्रय-विक्रय दंडनीय अपराध है।” ताकि आमजन जागरूक हों और भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें।

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