भीमताल । उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का सहयोग मिल रहा है। जनपद नैनीताल के कोटाबाग विकासखंड में नाबार्ड की सहायता से संचालित “जैविक खेती हेतु जैविक कीट नियंत्रण आधारित प्रौद्योगिकी के संवर्धन” परियोजना किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती और किसान कल्याण को प्राथमिकता देते हुए यह परियोजना गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर द्वारा कास्तकार विकास समिति, कोटाबाग के सहयोग से संचालित की जा रही है। दो वर्ष की इस परियोजना की कुल लागत 43.57 लाख रुपये है, जिसमें नाबार्ड की ओर से 30.90 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है, जबकि 12.67 लाख रुपये का अंशदान क्रियान्वयन संस्था द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में यह परियोजना कोटाबाग विकासखंड के पांच गांवों में संचालित है।
परियोजना का उद्देश्य किसानों को रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर पर्यावरण अनुकूल, कम लागत वाली और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत किसानों को जैविक कीट नियंत्रण तकनीक, जैविक एजेंटों के उत्पादन, प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक तरीकों और उनके व्यवहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अब तक 125 लघु एवं सीमांत किसानों को परियोजना से जोड़कर वैज्ञानिक प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 10 जागरूकता कार्यक्रम, 10 खेत प्रदर्शन, चार परिसर आधारित प्रशिक्षण और दो ग्राम स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। किसानों को जैव उर्वरक, जैविक एजेंट, फेरोमोन ट्रैप, चिपचिपे एवं प्रकाश प्रपंच, छिड़काव यंत्र सहित अन्य आवश्यक कृषि सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है।
परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों में कोटाबाग में लघु जैविक कीट नियंत्रण उत्पादन इकाई की स्थापना शामिल है। इस इकाई में ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास, ट्राइकोग्रामा, ब्यूवेरिया तथा मेटाराइज़ियम जैसे जैविक एजेंटों का स्थानीय स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है। इससे किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण जैविक सामग्री उपलब्ध होगी, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी और खेती की लागत में कमी आएगी।
इसके साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले वनस्पति आधारित जैविक घोलों और आधुनिक जैविक कीट नियंत्रण तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे भूमि की उर्वरता, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में नैनीताल ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने और “आत्मनिर्भर किसान–समृद्ध उत्तराखंड” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।