दिव्या पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों ने सीखा कचरा प्रबंधन का पाठ

3आर का संदेश देकर प्लास्टिक कचरा कम करने और स्रोत पर पृथक्करण के लिए किया जागरूक

भीमताल, 29 सितंबर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत चल रहे स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के 11वें दिन मंगलवार को दिव्या पब्लिक स्कूल में कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और 3आर को लेकर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कचरे को स्रोत पर ही अलग करने और प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने के लिए प्रेरित किया गया।

नगर आयुक्त नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम परितोष वर्मा के दिशा-निर्देशन में आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों को बताया गया कि कचरा प्रबंधन की शुरुआत कचरा पैदा होने के स्थान से ही होती है। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने से उसके पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और उचित निस्तारण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सकता है।

कार्यशाला में प्लास्टिक कचरे के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से एकल उपयोग प्लास्टिक और प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल कम करने का आह्वान किया गया। बाजार जाते समय कपड़े या जूट का थैला इस्तेमाल करने तथा प्लास्टिक सामग्री को खुले में न फेंकने और न जलाने के लिए भी जागरूक किया गया।

विद्यार्थियों को 3आर यानी कम करना, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण के बारे में सरल उदाहरणों से समझाया गया। अनावश्यक वस्तुओं और एकल उपयोग प्लास्टिक की खपत कम करने, दोबारा इस्तेमाल योग्य वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनका उपयोग करने और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग रखने की जानकारी दी गई।

कार्यशाला में विद्यार्थियों को स्वच्छता का संदेशवाहक बनने के लिए भी प्रेरित किया गया। उन्हें कहा गया कि वे विद्यालय में सीखी गई स्वच्छता की आदतों को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाएं। इससे घर और समाज में भी व्यवहार परिवर्तन लाया जा सकता है।

कार्यक्रम में वार्ड 57 की पार्षद रुक्मणी बिष्ट, बैंणी सेना परियोजना प्रबंधक नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम मनोज नेगी और एसबीएम टीम से मनीष पांडे समेत विद्यालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। नगर निगम की टीम ने विद्यार्थियों से संवाद कर स्वच्छता, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार से जुड़े विषयों की जानकारी दी।

अधिकारियों ने कहा कि विद्यालयों में इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल स्वच्छता की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहार परिवर्तन का सहभागी बनाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *