कमल ताल के अस्तित्व में जमी घास

लगभग आधे तालाब में जम चुकी है हरी घास। फूल हो रहे कम

निर्मल नेगी,

भीमताल ( नैनीताल)।नौकुचियायताल के कमल ताल के अस्तित्व में एक बार फिर काले बादल आते नजर आ रहे हैं। कमल ताल में जमी घास और नौकुचियाताल से आ रहे पानी के मुहाने पर जाली नहीं लगाने से कमल ताल में ग्रास कार्प नामक मछली के आने का खतरा बना हुआ है। बता दे की पूर्व में भी कमल ताल से कमल के फूल विलुप्त होने की कगार पर आ चुके थे । ग्रास कार्प नामक मछली ने कमल के फूलों की जड़ों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। जिसके चलते स्थानीय लोगों ने प्रशासन से झील के जीर्णोद्धार करने और कमल ताल से ग्रास कार्प मछली को निकालने की मांग की थी। जिस पर सिंचाई विभाग द्वारा तालाब से ग्रास कार्प मछली को निकाला और साथ में घास की सफ़ाई भी की थी ,इसके पश्चात् चार साल के बाद तालाब में कमल के फूल खिल उठे।

कमल ताल में कमल के फूल अभी भी मौजूद है। यहां की विशेषता इस ताल में खिलने वाले कमल के फूल ही है। पर तालाब में अब फूल खिलने का सिलसिला लगातार कम होता नजर आ रहा है। तालाब में जमी घास फूलों को काफी नुकसान पहुंचा रही है। तालाब के आधे से ज़्यादा हिस्से में घास जम चुकी है।नौकुचियाताल से सटे होने के कारण ग्रास कार्प मछली आने का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय निवासी अनिल
चनौतिया ने बताया की ताल में कमल के फूल चार साल बाद खिले है। लेकिन सिंचाई विभाग ने नौकुचियाताल से पानी आने वाले मुहाने पर जाली नहीं लगाई है। जिससे दोबारा झील में ग्रास कार्प मछली आने का ख़तरा है। और तालाब में काफी मात्रा में हरी घास जम गई है। जो फूलों को बर्बाद कर रही है। और फूल लगातार कम होते जा रहे हैं। प्रशासन को कमल ताल में जमी घास को हटाना चाहिए जिससे कमल ताल का अस्तित्व बना रहे।

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