नई फसल की आवक बढ़ने से कीमतों में नरमी, नासिक और अलवर से भी बढ़ेगी आपूर्ति
भीमताल : प्याज की कीमतों में अब गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से खरीफ प्याज की आवक बढ़ने के कारण पिछले दस दिनों में थोक भाव में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, नासिक और अलवर से भी प्याज की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, थोक मंडियों में कीमतें घटने के बावजूद खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को अभी पूरी राहत नहीं मिल रही है। कई बाजारों में प्याज 70 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर बिक रहा है।
नई फसल की आवक से पुराने प्याज की मांग घटी
प्याज की कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह दक्षिण और मध्य भारत से नई फसल की बढ़ती आवक है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से प्याज की उपलब्धता बढ़ने के कारण उत्तर भारत के खरीदारों की महाराष्ट्र के पुराने प्याज पर निर्भरता कम हुई है। निर्यातकों की ओर से भी नई फसल को प्राथमिकता दिए जाने से मार्च-अप्रैल में काटकर भंडारित किए गए प्याज की मांग पर दबाव पड़ा है।
राजस्थान से अक्टूबर के अंत तक नई फसल आने और महाराष्ट्र में नवंबर से कटाई शुरू होने की उम्मीद है। इससे आने वाले सप्ताहों में बाजार में प्याज की उपलब्धता और बढ़ सकती है।
खुदरा बाजार में राहत का इंतजार
थोक कीमतों में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में प्याज के दाम उसी अनुपात में नहीं घटे हैं। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के 126 शहरों में पिछले दो सप्ताह के दौरान खुदरा कीमतों में एक से 21 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में कीमतों में कमी का स्तर अलग-अलग रहा है।
ऐसे में उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि मंडियों में सस्ता हुआ प्याज खुदरा दुकानों तक कब और कितनी राहत पहुंचाता है।
बफर स्टॉक से भी बढ़ाई गई आपूर्ति
कीमतों पर नियंत्रण और उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बड़े शहरों तक बढ़ाई है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, आठ कांदा एक्सप्रेस और 467 ट्रकों के माध्यम से दो लाख क्विंटल से अधिक प्याज बाजार में पहुंचाया गया है। अधिक खपत वाले केंद्रों तक आपूर्ति बढ़ाने के लिए अतिरिक्त रेल रैक चलाने की भी योजना है।
किसानों के भाव पर भी पड़ सकता है असर
बाजार में प्याज की कीमतों में मौजूदा गिरावट का प्रमुख कारण नई फसल की बढ़ती आवक है। ऐसे में केवल सरकारी भंडार से प्याज जारी करने के बजाय मांग और आपूर्ति के अनुसार वितरण करना जरूरी होगा। नई फसल की आवक बढ़ने के दौरान भंडारित प्याज की अधिक मात्रा बाजार में उतारने से किसानों को मिलने वाले दाम पर भी दबाव पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों का रुख नई फसल की आवक, परिवहन और खुदरा बाजार तक आपूर्ति पहुंचने की गति पर निर्भर करेगा।