अतिरिक्त वसूली लौटानी होगी, नियम तोड़ने पर लाखों का जुर्माना और मान्यता निरस्त करने की चेतावनी
भीमताल। निजी विद्यालयों की मनमानी फीस वसूली पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने जिले के सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण और वसूली संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के तहत सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूले गए अतिरिक्त शुल्क का समायोजन या वापसी अनिवार्य होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ आर्थिक दंड से लेकर मान्यता निरस्त करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कई निजी विद्यालय शिक्षण शुल्क के अलावा प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य मदों में मनमाने तरीके से शुल्क वसूल रहे थे। अब प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक एवं औचित्यपूर्ण व्यय के आधार पर ही लिया जा सकेगा। शिक्षण एवं परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त अन्य शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में रखा जाएगा, जिसे न्यूनतम रखना होगा। इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) की स्वीकृति भी अनिवार्य होगी। किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
आदेश के अनुसार राज्य सरकार की एनओसी की शर्तों के तहत निजी विद्यालय तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि कर सकेंगे। इसके लिए भी पीटीए की स्वीकृति आवश्यक होगी। मनमानी शुल्क वृद्धि को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
विद्यालयों को पूरे शैक्षिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक और एक वार्षिक परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही कराई जा सकेंगी। परीक्षा शुल्क वास्तविक खर्च के आधार पर तय होगा और किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए 600 रुपये से अधिक नहीं लिया जा सकेगा। वहीं स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) शुल्क केवल एक रुपये निर्धारित किया गया है।
अभिभावकों को शुल्क भुगतान के लिए मासिक, त्रैमासिक, छमाही अथवा वार्षिक विकल्प उपलब्ध कराना होगा। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त शुल्क जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा तथा शुल्क की रसीद देना अनिवार्य होगा।
आदेश के अनुसार सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूले गए अतिरिक्त शुल्क का समायोजन एक जुलाई के शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त राशि जुलाई के शुल्क से अधिक होगी तो शेष धनराशि आगामी महीनों के शुल्क में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को सात दिन के भीतर समायोजन का प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने चेतावनी दी कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम, सीबीएसई उपविधियों एवं अन्य प्रचलित नियमों के तहत एक लाख से पांच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड, एनओसी निरस्त करने तथा मान्यता समाप्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।