झूतिया में बाघ का बढ़ता आतंक, दो माह से दहशत में जी रहे ग्रामीण

वन विभाग पर लापरवाही का आरोप, सरकार से ठोस रणनीति की मांग

भीमताल। रामगढ़ ब्लॉक के झूतिया गांव में बाघ का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले दो महीनों से ग्रामीण भय के साये में जीवन यापन कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बच्चों का स्कूल जाना और महिलाओं का बाजार तक निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। गांव में लगातार हो रहे हमलों से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुकी है।
ग्रामीणों के अनुसार बाघ आए दिन मवेशियों को निशाना बना रहा है। अब तक कई गाय, बैल और अन्य पशु बाघ का शिकार हो चुके हैं। गांव के अधिकांश कुत्ते भी खत्म हो गए हैं। बीती रात एक ग्रामीण के घोड़े पर भी बाघ ने हमला कर दिया। लगातार हो रही घटनाओं से क्षेत्र में दहशत और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं।
कांग्रेस नेता मनोज शर्मा ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग बाघ की गतिविधियों का सही आकलन करने और प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन करने में विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गंभीर योजना के अभाव में समस्या विकराल रूप ले चुकी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी रणनीति बनाई जाती तो हालात काबू में हो सकते थे।
उन्होंने सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पूरे भीमताल विधानसभा क्षेत्र सहित पहाड़ी इलाकों में लोग भयाक्रांत हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के बजाय केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो जनता आंदोलन को बाध्य होगी।
झूतिया गांव के युवा देवेंद्र सिंह मेर तथा बोहराकोट गांव के सरपंच भुवन सिंह दर्मवाल ने प्रशासन से तत्काल गश्त बढ़ाने, बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने और ग्रामीणों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भारी रोष है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने तथा क्षेत्र में स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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