भीमताल, 29 जुलाई। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पांडे ने बुधवार को जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति, मलबा निस्तारण, पुनर्वास, गुणवत्ता नियंत्रण और सामाजिक दायित्व से जुड़े कई मामलों पर उन्होंने नाराजगी जताई और अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से कमियां दूर कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण में सामने आया कि मलबा निस्तारण के लिए तीन डंपिंग साइटें चिन्हित हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक का ही उपयोग किया जा रहा है। वहां भी मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं हो रहा है और बारिश के दौरान नदी किनारे डाला गया मलबा बह रहा है। इस पर सीडीओ ने सभी डंपिंग साइटों को शीघ्र विकसित कर पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप मलबा निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) नीति के तहत करीब 408 करोड़ रुपये के मुआवजे की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 68 करोड़ रुपये का मुआवजा अभी वितरित होना शेष है, जबकि 12 करोड़ रुपये से जुड़े 14 परिवारों के मामले मध्यस्थता में लंबित हैं। सीडीओ ने इन मामलों का शीघ्र निस्तारण कर प्रभावित परिवारों को समय पर राहत देने के निर्देश दिए।
समीक्षा में यह भी पाया गया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली थर्ड पार्टी एजेंसी पिछले चार-पांच माह से साइट का निरीक्षण करने नहीं पहुंची है, जबकि नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में निरीक्षण होना चाहिए। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए नियमित गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में वर्तमान में मैनपावर और मशीनरी आवश्यकता से कम है, जिससे वर्ष 2026-27 के निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले कार्य पीछे चल रहा है। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने संसाधनों में वृद्धि कर निर्माण कार्यों में तेजी लाने को कहा।
बैठक में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए पराग फार्म में विकसित की जा रही कॉलोनी की प्रगति की भी समीक्षा की गई और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तय समय में पूरी करने के निर्देश दिए गए।
कॉर्पोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी (सीईआर) योजना के तहत 13 करोड़ रुपये की लागत से 19 प्रभावित गांवों में 1,175 सोलर लाइटें लगाने की योजना की समीक्षा करते हुए सीडीओ ने स्थापना कार्य जिला प्रशासन की निगरानी में कराने के निर्देश दिए। साथ ही पिछले वर्ष लगाई गई सोलर लाइटों का एसडीएम एवं पीओ उरेडा की संयुक्त समिति से भौतिक सत्यापन कराने को कहा।
सामाजिक दायित्व के तहत शिक्षा, शौचालय, स्मार्ट क्लास समेत अन्य विकास कार्यों के लिए निर्धारित 13 करोड़ रुपये की राशि में अब तक केवल 40 लाख रुपये खर्च होने पर भी मुख्य विकास अधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने प्रभावित गांवों के लिए वर्षवार कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान परियोजना प्रबंधक ललित कुमार, हिमांशु पंत, जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी डॉ. मुकेश नेगी, यूयूएसडीए के परियोजना प्रबंधक कुलदीप कुमार सहित विभिन्न अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं परियोजना के महाप्रबंधक के निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की।