भीमताल, 25 जुलाई। विकासखंड कोटाबाग के ग्राम गिंटी में नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से स्थापित जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई का शनिवार को शुभारंभ किया गया। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कीट विज्ञान विभाग और कास्तकार विकास समिति के संयुक्त प्रयासों से स्थापित इस इकाई से किसानों को गुणवत्तापूर्ण जैव नियंत्रण एजेंट उपलब्ध होंगे।
परियोजना की कुल लागत 43.57 लाख रुपये है, जिसमें नाबार्ड की ओर से 30.90 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। परियोजना का उद्देश्य प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को कम करना और किसानों को पर्यावरण अनुकूल कीट प्रबंधन तकनीकों से जोड़ना है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक (अनुसंधान), कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक, कीट विज्ञान एवं पादप रोग विज्ञान विभागों के विभागाध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, बैंक अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधियों सहित क्षेत्र के करीब 80 प्रगतिशील किसानों ने प्रतिभाग किया।
परियोजना समन्वयक डॉ. आरपी मौर्य ने परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि इकाई के माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण जैव नियंत्रण एजेंट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने के साथ ही उत्पादन लागत में कमी आएगी और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने किसानों के प्रशिक्षण, प्रदर्शन कार्यक्रमों और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी भी दी।
इसके बाद अतिथियों और किसानों ने नवस्थापित जैव नियंत्रण उत्पादन प्रयोगशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान आधुनिक संयंत्र एवं मशीनरी, लाभकारी सूक्ष्मजीवों की कल्चर, जैव नियंत्रण एजेंटों के उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया और गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली का प्रदर्शन किया गया।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने कहा कि नाबार्ड ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार और सतत आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए जैव नियंत्रण आधारित तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह इकाई नैनीताल जनपद के किसानों के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगी।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों से जैव नियंत्रण तकनीकों को अपनाने और रासायनिक कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया। किसानों ने प्रयोगशाला एवं उत्पादन व्यवस्था का अवलोकन कर इस पहल की सराहना की।
नाबार्ड के सहयोग तथा जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर और कृषि विज्ञान केंद्र, कोटाबाग के संयुक्त प्रयासों से स्थापित यह परियोजना जनपद में वैज्ञानिक, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।