भीमताल । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईवीआरआई) के मुक्तेश्वर परिसर में मंगलवार को किसान मेले का भव्य आयोजन किया गया। मेले का मुख्य विषय “पर्वतीय क्षेत्रों के लिए जलवायु अनुकूल पशुपालन” रहा। कार्यक्रम में धारी, दाड़िमा, शशबनी और सुपी सहित आसपास के गांवों से पहुंचे एक हजार से अधिक किसानों ने भाग लेकर आधुनिक कृषि व पशुपालन से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी ली।
मेले में स्थानीय नस्ल की बदरी गाय की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में बदरी गाय जैसी स्थानीय नस्लें अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता और औषधीय गुणों के कारण पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अधिक उपयोगी और सुरक्षित हैं। साथ ही दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए होल्स्टीन फ्रीजियन (एचएफ) क्रॉस ब्रीड के वैज्ञानिक प्रबंधन की भी जानकारी दी गई।
आईवीआरआई मुक्तेश्वर के संयुक्त निदेशक डॉ. यशपाल सिंह मलिक के नेतृत्व में आयोजित मेले में वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद हुआ। वीपीकेएएस अल्मोड़ा से आए विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मी कांत ने पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की कमी, पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर उत्पादन के उपायों पर तकनीकी सत्र लिए। इस दौरान किसानों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया।
मेले में खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रखते हुए आय के अन्य स्रोतों पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रदर्शनी स्टालों के माध्यम से किसानों को मशरूम उत्पादन, बैकयार्ड कुक्कुट पालन और ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बकरी पालन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि कम लागत में मशरूम उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर साधन बन सकता है।
इस अवसर पर संस्थान की ओर से क्षेत्र के उन किसानों को प्रगतिशील किसान सम्मान से सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने खेतों में नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर अन्य किसानों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्हें प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।
संयुक्त निदेशक डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने कहा कि किसान मेले का उद्देश्य पर्वतीय किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों के बावजूद उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।