कांग्रेस नेता मनोज शर्मा ने बीमा कंपनियों पर लगाया किसानों के शोषण का आरोप
भीमताल। धारी ब्लॉक के किसानों को आलू की मौसम आधारित फसल बीमा योजना का पर्याप्त लाभ नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता मनोज शर्मा ने सरकार और बीमा कंपनियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि साल दर साल बीमा कंपनियां धारी क्षेत्र के किसानों के साथ भेदभाव कर रही हैं और किसानों को उनके नुकसान के सापेक्ष बीमा राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
मीडिया को जारी बयान में मनोज शर्मा ने कहा कि धारी ब्लॉक के आलू उत्पादक किसानों को मौसम आधारित फसल बीमा योजना में भारी अनियमितताओं और उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य विकासखंडों की तुलना में धारी के किसानों को बेहद कम बीमा राशि मिलती है, जबकि किसानों को मौसम की मार से भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सांसद और विधायक किसानों की समस्याओं को लेकर दिखावे के लिए हाई वोल्टेज ड्रामा करते हैं, लेकिन जब किसानों को वास्तविक राहत देने की बात आती है तो उनके नुकसान के अनुपात में बीमा राशि नहीं मिलती। शर्मा ने सरकार, जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और बीमा कंपनियों के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार और जनप्रतिनिधि किसानों के हितों को लेकर गंभीर होते तो बीमा कंपनियां लगातार किसानों के साथ इस तरह की मनमानी करने की हिम्मत नहीं कर पातीं।
शर्मा ने कहा कि पिछले वर्ष भी धारी के आलू उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन बीमा कंपनी की ओर से महज 1.33 प्रतिशत मुआवजा दिया गया। उन्होंने कहा कि धारी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित अन्य विकासखंडों में बीमा भुगतान के प्रतिशत में काफी अंतर रहा। उनके अनुसार, इस मामले में गठित जांच समितियों ने भी बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और किसानों की शिकायतों को गंभीर माना, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उचित राहत नहीं मिल सकी।
उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों की कथित मनमानी के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक उत्पीड़न भी झेलना पड़ रहा है। सरकार की उदासीनता से ऐसी कंपनियों का मनोबल बढ़ रहा है।
शर्मा ने सरकार से मांग की कि प्रत्येक वर्ष किसानों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन कर उन्हें पूरी पात्र बीमा राशि का भुगतान किया जाए। साथ ही किसानों के हितों की अनदेखी करने वाली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए और क्षेत्र विशेष के किसानों के साथ बीमा भुगतान में किया जा रहा कथित भेदभाव तत्काल समाप्त किया जाए।