मध्यस्थता से समाधान अभियान 31 दिसंबर तक, राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर को

समझौते के आधार पर मामलों के निस्तारण पर जोर, प्री-लिटिगेशन मामलों का भी होगा समाधान

भीमताल, 8 सितंबर। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आमजन को त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के लिए दो महत्वपूर्ण विधिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने बताया कि ‘मध्यस्थता से समाधान-Mediation 3.0’ अभियान 31 दिसंबर तक चलेगा, जबकि राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 12 सितंबर (शनिवार) को किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशन में देशभर में तीसरी बार Mediation 3.0 अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान एक अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक संचालित होगा। अभियान के तहत उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों और जनपद न्यायालयों में लंबित मामलों का प्रशिक्षित मध्यस्थों के माध्यम से आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षित मध्यस्थ उपलब्ध हैं। लंबित मामलों के पक्षकार अभियान की अवधि में मध्यस्थता के माध्यम से अपने विवाद का समाधान करा सकते हैं।

12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत

प्रदीप मणि त्रिपाठी ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर 12 सितंबर को देशभर में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएगी। उत्तराखंड में भी इसी दिन लोक अदालत का आयोजन होगा। उच्च न्यायालय में लंबित मामलों के लिए उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति तथा जिला न्यायालयों में लंबित मामलों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की देखरेख में लोक अदालत आयोजित की जाएगी।

लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ ही प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निस्तारण किया जाएगा। प्री-लिटिगेशन मामले ऐसे विवाद हैं, जो भविष्य में न्यायालय के समक्ष पहुंच सकते हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि न्यायालयों में लंबित अपने मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएं।

समझौते से दोनों पक्षों की जीत

सदस्य सचिव ने कहा कि “Bad compromise is better than a good lawsuit” यानी कितना भी बुरा समझौता अच्छे से अच्छे मुकदमे के फैसले से बेहतर होता है। मुकदमे के निर्णय में एक पक्ष की जीत और दूसरे की हार होती है और आगे अपील की संभावना भी बनी रहती है। वहीं समझौते में दोनों पक्षों की जीत होती है, अपील की आवश्यकता नहीं रहती और मामला शीघ्र निस्तारित हो जाता है। इससे आपसी वैमनस्यता समाप्त होने के साथ ही भाईचारा भी कायम रहता है।

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