भीमताल, 29 जुलाई। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य योगेश रजवार के नेतृत्व में बुधवार को चाइल्ड हेल्पलाइन नैनीताल, बाल कल्याण समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य बाल संस्थाओं में व्यवस्थाओं और बच्चों की सुरक्षा की स्थिति का आकलन करना था।
निरीक्षण के दौरान हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के समीप गफूर बस्ती क्षेत्र में संचालित एक गैर-सरकारी संस्था ‘सुचेतना’ का निरीक्षण किया गया। मौके पर मौजूद संस्था की कार्मिक मीना सिंह ने टीम को बताया कि संस्था का संचालन फादर पाईस द्वारा किया जा रहा है तथा इसके संचालन के लिए मिशनरी से आर्थिक सहायता प्राप्त होती है।
जांच के दौरान संस्था में पांच बालिकाएं और छह बालक मौजूद मिले। टीम के अनुसार संस्था से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या निर्धारित मानकों से जुड़ा अभिलेख मौके पर प्रस्तुत नहीं किया जा सका। साथ ही संस्था किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत पंजीकृत भी नहीं पाई गई। निरीक्षण में बच्चों के बैठने की व्यवस्था भी असुरक्षित मिली। टीम ने यह भी बताया कि वहां आने वाले कई बच्चे पहले से विद्यालयों में पंजीकृत थे।
आयोग के सदस्य योगेश रजवार ने बाल कल्याण समिति एवं चाइल्ड हेल्पलाइन को मामले की जांच कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। वहीं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को संस्था एवं उसके संचालकों की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
योगेश रजवार ने कहा कि बिना पंजीकरण के बच्चों से संबंधित संस्थाओं का संचालन अत्यंत गंभीर मामला है और इससे बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संस्था के संचालन एवं वित्तीय सहायता से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिले में बच्चों से संबंधित गैर-सरकारी संस्थाओं का औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा।