कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्वर्ण जयंती पर उपराष्ट्रपति का संबोधन, ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने की वकालत
भीमताल : भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने 25 जून 1975 को लगे आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र पर “भूकंप जैसी आपदा” बताया और इसे ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा, “पचास वर्ष पूर्व इसी दिन लोकतंत्र पर आघात हुआ। प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्तिगत हित में कैबिनेट को दरकिनार कर आपातकाल लागू किया गया। उस अंधकारमय काल में एक लाख चालीस हजार लोगों को जेल में डाला गया और सर्वोच्च न्यायालय ने नौ उच्च न्यायालयों के निर्णयों को पलट दिया।”
उन्होंने कहा कि “युवाओं को आपातकाल के उस इतिहास को जानना चाहिए ताकि वह फिर कभी दोहराया न जा सके।” उन्होंने न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना के साहसिक निर्णय को याद करते हुए उन्हें भारतीय न्यायपालिका का गौरव बताया।
शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “शैक्षणिक संस्थान केवल डिग्रियाँ देने का स्थान नहीं, बल्कि नवाचार और नेतृत्व निर्माण की प्रयोगशालाएँ हैं। छात्र भविष्य नहीं, राष्ट्र की नियति गढ़ने वाले हैं। इसलिए संस्थानों को चाहिए कि वे पूर्व छात्रों को संगठित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करें।” कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से नि.) गुरमीत सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि “बीते 50 वर्षों में कुमाऊं विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक ज्ञान की पहुँच सुनिश्चित की है। विश्वविद्यालयों को युवाओं को केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और उत्तरदायी नागरिक भी बनाना चाहिए।”
राज्यपाल ने कहा कि “भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्या युवा है, और इसे राष्ट्र निर्माण की ताकत में बदलने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगारपरक कौशल, और सामाजिक चेतना अनिवार्य है।” उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना विकसित करें।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत अपने माता-पिता की स्मृति में दो पौधे भी रोपे। समारोह में उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक सरिता आर्या, राम सिंह कैड़ा, पूर्व सांसद डॉ. महेन्द्र पाल, कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी वंदना सिंह, कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत, ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. ओ.पी.एस. नेगी, जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान समेत अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।