“पहले निजी फोन से काम करवाया, अब वेतन भी रोका!” — शिक्षकों ने पूछा: क्या अब मोबाइल भी सरकारी घोषित हो जाएगा

1500 शिक्षकों की तनख्वाह पर ब्रेक, आदेश के विरोध में तीनों शिक्षक संगठन एकजुट, आंदोलन की दी चेतावनी

भीमताल : जहाँ एक ओर शिक्षक पंचायत चुनाव की ड्यूटी निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्य शिक्षा अधिकारी के एक आदेश ने उनके माथे पर चिंता की रेखाएँ खींच दी हैं।
“विद्या समीक्षा केंद्र ऐप” पर उपस्थिति दर्ज न करने वाले शिक्षकों का वेतन रोकने का फरमान, सीधे तौर पर लगभग 1500 शिक्षकों पर गाज बनकर गिरा है।
“न निजी फोन बचे, न वेतन, अब क्या आत्मा भी सरकार को दें?”

तीनों प्रमुख शिक्षक संगठनों राजकीय, प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल ने एक सुर में कहा है कि शिक्षकों ने आज तक जो भी ऑनलाइन कार्य किया, वह अपने निजी फोन, निजी डेटा और निजी प्रयासों से किया। अब यदि सरकार चाहती है कि ये सब कार्य अनिवार्य रूप से हों, तो कृपया पहले वह हमें सरकारी फोन, सिम, और इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराए। संगठनों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि इस प्रकार की एकतरफा कार्यवाही न केवल तानाशाही है, बल्कि शिक्षकों की गरिमा पर भी प्रश्नचिन्ह है।
“ड्यूटी हमारी, साधन हमारे, और अब वेतन भी रोका जाएगा।” यह सवाल हर शिक्षक के मन में है।

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“आदेश वापस लो, वरना अगस्त में होगा आमरण अनशन”

शिक्षक संगठनों ने सीईओ को पत्र सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक वेतन रोकने का आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक वह किसी भी प्रकार की वार्ता में भाग नहीं लेंगे। यदि बात नहीं मानी गई, तो अगस्त के पहले सप्ताह में धरना प्रदर्शन और आवश्यकता हुई तो आमरण अनशन भी किया जाएगा।”
विरोध की अगुवाई करने वालों में
मनोज तिवारी अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ, गिरीश जोशी अध्यक्ष, राजकीय शिक्षक संगठन,देवेंद्र कुमार अध्यक्ष, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन,महामंत्री बंशीधर कांडपाल, पंकज बढ़ानी, डी.एन. भट्ट आदि रहे।
कई शिक्षकों ने गुस्से में कहा कि “हम पढ़ाने आए थे, ऐप्स में उलझाने नहीं।”
अब देखना यह है कि मुख्य शिक्षा अधिकारी इस आक्रोश को गंभीरता से लेते हैं या अनदेखा करते हैं, क्योंकि ये सिर्फ वेतन का मुद्दा नहीं, सम्मान का सवाल है।

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